खाना खाते समय ना करें ये 9 काम

दोनों हाथ, दोनों पैर और मुहं को धोकर ही भोजन करना चाहिए।

1. भोजन करने से पहले अन्नदेवता व अन्नपूर्णा माता की स्तुति करके और उनका धन्यवाद देते हुए सभी भूखों को भोजन प्राप्त हो कोई भी दुनिया में भूका न रहे ईश्वर से ऐसी प्रार्थना करने के बाद ही भोजन करना चाहिए। भोजन बनाने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से  मंत्र जाप करते हुए ही रसोई घर में भोजन बनाएं और सबसे पहले तीन रोटियां (गाय, कुत्ते और कौवे ) के लिए अलग निकालकर और फिर अग्निदेव को भोग लगाने के बाद ही घर वालों को खिलाएं।

2. प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है क्योंकि पाचनक्रिया की जठराग्नि सूर्योदय से दो घंटे बाद तक एवं सूर्यास्त से ढाई घंटे पहले तक प्रबल रहती है। जो शख्स केवल एक समय ही भोजन करता है उसे योगी और जो दो समय भोजन करता करता है वह भोगी कहलता हैं। एक प्रसिद्ध कहावत है कि सुबह का खाना खुद खाओ और दोपहर का खाना दूसरों को दो और रात का भोजन अपने दुश्मन को खिलाओ।

3. भोजन पूर्व व उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके ही खाना चाहिए दक्षिण दिशा की और किया गया भोजन प्रेत को प्राप्त होता है और पश्चिम दिशा की और किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है।

4. कभी भी टूटे-फूटे बर्तनों में भोजन नहीं करना चाहिए। मल-मूत्र का वेग होने पर अनबन के माहौल में, ज्यादा शोर में, पीपल, वटवृक्ष के नीचे कभी भोजन नहीं करना चाहिए। परोसे गये भोजन का कभी तिरस्कार नहीं करनी चाहिए। ईर्ष्या, भय, गुस्सा, लोभ, रोग, दीनभाव, द्वेषभाव के साथ करा हुआ भोजन कभी भी नहीं पचता है। खड़े होकर या जूते पहनकर भोजन नहीं करना चाहिए।

5. भारी पेट भरा भोजन कभी न करें। किसी के द्वारा बचाया हुआ भोजन भी कभी न करें। कभी भी आधा खाया हुआ फल या मिठाइयां आदि पुनः नहीं खाना चाहिए। खाना छोड़कर उठ जाने पर कभी दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए। जो ढिंढोरा पीट पीटकर खिला रहा हो उसका भोजन कभी नहीं करना चाहिए। अनादर युक्त, अवहेलना पूर्ण परोसा गया भोजन कभी न करें।

6. भोजन के समय मौन रहना चाहिए। रात को कभी पेटभर कर नहीं खाना चाहियें। अगर बोलना ज़रूरी हैं तो सिर्फ सकारात्मक बातें ही करें। भोजन करते समय किसी भी तरह की समस्या पर चर्चा न करें। भोजन को बहुत ही चबा-चबाकर खाना चाहियें। सबसे पहले मीठा, फिर नमकीन, और बाद में कड़वा खाना चाहिए। सबसे पहले रसदार चीज़, बीच में गरिष्ठ, और आखिर में द्रव्य पदार्थ ग्रहण करें। थोड़ा खान-खाने वाले को आरोग्य, आयु, बल, सुख, सुंदर संतान व सौंदर्य प्राप्त होता है।

7. भोजन के तुरंत बाद ही पानी या फिर चाय नहीं पीनी चाहिए भोजन के तुरंत बाद घुड़सवारी, दौड़ना, बैठना, शौच वगेरह नहीं करना चाहिए।

8. भोजन के करने के बाद दिन में टहलना और रात को सौ कदम टहलकर बाईं करवट लेटे अथवा वज्रासन में बैठने से भोजन का पाचन बहुत अच्छा होता है भोजन करने के एक घंटे बाद मीठा दूध और फल खाने से भोजन का पाचन काफी अच्छा होता है।

9. रात को दही, सत्तू, तिल और भारी भोजन नहीं करना चाहिए। दूध के साथ कभी नमक, दही, खट्टे पदार्थ, मछली और कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए। शहद और घी का एक समान मात्रा में सेवन नहीं करना चाहियें। दूध और खीर के साथ में कभी खिचड़ी नहीं खानी चाहिए।

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