में रोटी हूँ में देखने में बहुत सुंदर लगती हूँ, सुनोगे मेरी दर्द भरी कहानी?

roti ki kahani मैं रोटी हूँ देखने में बहुत ही सुन्दर लगती हूँ। मुझे पाने के लिए सभी लोग बहुत ज़्यादा उत्सुक रहते हैं। कोई कितना भी बड़ा धनवान क्यों न हो वह मेरे बिना रह ही नहीं सकता। रूपयों, पैसों की बोरियों से कभी भी किसी का पेट नहीं भरता है।

मैं ही सबके काम आती हूँ और सबका पेट भर्ती हूँ। चाहे निर्धन हो या धनवान, बच्चे हो या बूढ़े, पुरूष हो या स्त्रियाँ मुझे पाए बिना कोई भी सुख की सांस नहीं ले सकते मै यह सब जानती हूँ। लेकिन क्या तुम ने कभी सोचा है कि मैंने यह रूप कैसे पाया।

आओ सुनो मेरी कहानी मेरी ज़ुबानी मुझे खाना जब, तब आप मेरी यह कहानी सुन लो

मेरा जन्म और बचपन

मेरा जन्म खेतों में हुआ है और धरती माँ की गोद में मेरा पालन-पोषण हुआ है। सर्द-गर्म हवा ने प्यार से मुझे अपने पालने में झुलाया। पक्षियों ने मेरे लिए लोरियाँ गाई हैं। मैं पौधों की बालियों में खूब मस्ती से झूमती रही हूँ। मुझे इस दुनिया में चलने वाले छल कपट का कुछ भी पता ना था। बारिश का पानी पीती रही और चांदनी रात के मज़े लेती रही।

मेरा यौवन

मेरा बचपन बीत गया और में यौवन की दहलीज पर पहुँच गई तो फिर मेरे काटने की तैयारी शुरू होने लगी। मेरी खुशी किसी से भी देखी नहीं गई। वह किसान जो मुझे देखकर काफी ज़्यादा खुश हुआ करता था वह मुझे काटने की तैयारी में लग गया।

परिवार से पृथक

मुझे उसी किसान ने अपने क्रूर हाथों से काट दिया। मैं अपने ही परिवार वालो से अलग कर दी गई। मेरा तो दिल ही बैठा जा रहा था। अभी मेरा दुख कम भी नहीं हुआ था कि मेरे ऊपर अत्याचारों का पहाड़ टूट पड़ा। मुझको इक्ट्ठा कर दिया गया। और फिर मुझ पर खूब बैलों को चलाया-फिराया गया। मैं उनके पैरों के नीचे बहुत रोई और चिल्लाई लेकिन मेरी किसी ने नहीं सुनी।

ऊपरी सहानुभूति

अब मेरे साथ ऊपरी सहानुभूति दिखाई गई। ये सहानुभूति एकदम दिखावटी थी। मुझको नहला धुलाकर साफ सुथरा करके ढेर में जमा कर दिया गया। मेरा एक-एक दाना ऐसे चमकने लगा मानो जैसे ये सोने के कण हों।

मुझको ऐसा लगने लगा कि मेरा जीवन बहुत ही महत्वपूर्ण है। मेरे इस चमके हुए रूप को देखकर लोगों की आँखें चौंधिया गई। फिर मुझे बोरों में भर कर एक तरफ रख दिया गया। मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मुझे जेल में बंद कर दिया हो। दोपहर की तेज़ धूप से मैं बहुत ही व्याकुल हो गई।

मेरी नीलामी

अब मेरे नीलाम होने का टाइम भी आ गया। खुद को नीलाम करना कितना ज़्यादा कष्टदायक कार्य होता है, यह कोई मुझ से पूछे व्यापारियों के झुंड ने मुझे चारो तरफ से घेर लिया। फिर मेरी परख होने लगी। उस जमा भीड़ में कुछ परखी व्यापारी भी थे। जिन्होंने मेरी सब से ऊँची बोली लगाई। मैं उस वक्त बेताज रानी थी। फिर वहाँ से मुझे दोबारा बोरों में भर दिया गया। फिर मुझे तोलकर अलग-अलग दुकानों पर भेज दिया गया।

पुनः खरीद

दुकानों पर एक बार फिर से मुझे प्रदर्शन के लिए खोल कर रख दिया गया। वह तुम ही तो थे जो मुझे दूकान से खरीद कर घर लाए थे। फिर घर पर जाकर मुझको स्नान कराया गया। और अच्छे से सुखाया गया। मुझे एकदम साफ सुथरा किया गया और फिर मुझे चक्की पर पीसने के लिए भेज दिया गया। और वहां मुझको दो पाटों के बीच में डालकर पीसा गया। मेरा आटा बनाकर फिर उसमें पानी डालकर गूंधा गया।

वर्तमान रूप

फिर उस आटे को बेलकर के मुझे रोटी का रूप दे दिया गया। फिर भी मुझे छोड़ा नहीं गया। जलते हुए तवे पर मुझको डाल दिया गया। मेरा सारा शरीर जल गया लेकिन मैं फूल कर कुप्पा हो गई। फिर मेरे इस फूले हुए रूप को देखकर तुम बहुत ज़्यादा प्रसन्न हो गये। यह है मेरी पूरी कहानी।

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