कैसे पता करे आपका खाना पच रहा हैं या सड़ रहा हैं How To Improve Digestion Naturally At Home

हमारी बॉडी में ज़्यादातर बीमारियाँ पेट से ही होती हैं और इसकी वजह हैं, की हमारे द्वारा खाया गया भोज़न सही से पच नहीं रहा हैं या हमारे खाने का तरीका गलत हैं। इसलिए हमे बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी बीमारी से बचने के लिए अपने डाइजेस्टिव सिस्टम को समझना बहुत जरूरी हैं। अगर आप लम्बे समय तक जीना चाहते हैं, तो इसके लिए भी आपको अपने डाइजेस्टिव सिस्टम को समझना पड़ेगा। जापान में ओकिनावा नाम की एक जगह हैं। वहा पर लोग लम्बे समय तक जीते हैं।

बूढ़ी उम्र में भी वहा के लोग फिट, हेल्दी और एक्टिव रहते हैं। जबकि हमारे यहाँ पर ऐसा नहीं होता हैं। हम जैसे-जैसे बूढ़े होते हैं हमे अनेक बीमारियाँ घेर लेती हैं और हम लम्बे समय तक भी नही जी पाते हैं। आप सबसे पहले ये जाने की आपका खाना पच रहा हैं, या सड़ रहा हैं। ज़्यादातर लोगो को यही लगता हैं, कि हमारा खाना पेट में पचता हैं। लेकिन ऐसा नहीं है हम आपको बता दे, कि हमारे खाना पचने की प्रक्रिया मुहं से ही शुरू हो जाती हैं।

जब हम खाना खाते हैं, तो हमारे मुहं में जो स्लाइवा होती हैं। वो खाने को सॉफ्ट करती हैं और दांत खाने को छोटे-छोटे टुकड़ो में तोड़ता हैं। अगर हम स्टार्च बेस जैसे आलू या फ्रूट्स खाते हैं, तो स्लाइवा खाने को ब्रेक करती हैं। जिससे खाने का मेज़र पोर्शन हमारे मुहं में ही डाइजेस्ट हो जाता हैं।

इसलिए खाने को आपको खूब अच्छे से चबाकर खाना हैं। अगर आप खाने को अच्छे से नहीं चबाएंगे, तो खाने को सड़ने की गलती आप अपने मुहं से ही कर रहे हैं। जब हम खाने को अच्छे से चबाकर निगलते हैं। तो खाना इसोफेगस से होकर हमारे पेट में पहुँचता हैं। खाने का पेट में जाते हैं। हमारा पेट तीन एंजाइम रिलीज़ करता हैं। जो हैं पेप्सिन, म्यूकस और हाइड्रोक्लोरिक एसिड इनमे से पेप्सिन खाने में प्रोटीन को डाइजेस्ट करने का काम करता हैं।

लेकिन इस पेप्सिन को भी काम करने के लिए एसिडिक मीडियम की जरूरत होती हैं और ये एसिड हमे हाइड्रोक्लोरिक एसिड से मिलता हैं। लेकिन ये एसिड इतना स्ट्रोंग होता हैं, कि ये हमारे पेट को काट भी सकते हैं। ऐसा ना हो इसलिए म्यूकस आपके पेट की अंदरूनी दीवारों को चारो तरफ से घेर कर इसकी रक्षा करता हैं।

अगर हाइड्रोक्लोरिक एसिड की मात्रा ज़्यादा हो जाएँ और म्यूकस की मात्रा कम हो जाएँ, तब आपके पेट में छाले पड़ सकते हैं और इसको अल्सर कहते हैं। आपके पेट में तीनो एंजाइम आने के बाद आपका पेट चर्निंग एक्टिविटी (मंथन गतिविधि) करता हैं। इससे पेट के एंजाइम खाने में सब तरफ से अच्छी तरीके से मिल जाते हैं। जिसकी वजह से हमारा खाना अच्छी तरह से पच जाता हैं।

कभी भी आपको फुल पेट भरकर खाना नहीं खाना चाहिए। पेट में थोड़ी जगह छोड़नी चाहिए। अगर आप ओवर ईटिंग कर लेते हैं, तो तब आपका खाना पचने की जगह पर सड़ने लगेगा। ज़्यादा खाना खाने पर हमारा पेट चर्निंग एक्टिविटी ही नहीं कर पता है। जिसकी वजह से खाना ज़्यादा टाइम तक हमारे पेट में पड़ा रहता हैं और फिर ये पड़े-पड़े सड़ने लगता हैं। खाना सड़े नहीं इसलिए हमे पेट में थोड़ी जगह छोड़नी चाहिए जिससे खाना मूव कर सके।

पेट में खाना चार से पांच घंटे तक रहने के बाद जब छोटी आंत में जाता हैं। तो वहा ये बाइल जूस से मिल जाता हैं और बाइल जूस खाने में उपस्थित फैट को डाइजेस्ट करता हैं। आपके खाने में कुछ इंस्टेस्टाइनल जूस भी मिक्स होते हैं। जो खाने में उपस्थित प्रोटीन को डाइजेस्ट करते हैं। छोटी आंत की दीवारे खाने में नुट्रीएंट्स को अब्ज़ोर्ब करके ब्लड सेल्स तक पहुंचा देती हैं। जिससे सारे पौषक तत्व हमारे पूरे शरीर को मिल जाते हैं।

अब जो खाना सही से डाइजेस्ट नहीं होता हैं, वो बाकी के वेस्ट मटेरियल के साथ बड़ी आंत में चला जाता हैं और फिर वहा से बाहर निकल जाता है। इस तरह से आपने डाइजेशन सिस्टम को समझ लिया हैं। अब ये समझे की आप अपने खाने की आदत को किस तरह से बेहतर बना सकते हैं। जिससे आपका खाना कभी ना सड़े और आप लम्बे समय तक खुशहाल जीवन जी सके।

1- खाना हमारे मुहं में जितने कम समय तक रहेगा। उसे पेट में पचने की लिए उतना ही ज़्यादा समय लगेगा। इसलिए आपको खाने को खूब चबाकर निगलना चाहिए। क्यूंकि खाने का डाइजेशन मुहं से ही शुरू हो जाता हैं। अगर आप अपने खाने को अच्छे से नही चबाओगे और इसको हल्का सा चबाकर निगल लेगे, तो क्या होगा कि आपके पेट में सॉलिड फ़ूड पार्टिकल चले जाएंगे और पेट में जो एंजाइम होते हैं। जो खाने को पचाने का कार्य करते हैं।

वो एंजाइम खाने में मिक्स नहीं होगे और ये सॉलिड फ़ूड डाइजेस्ट नही होगा। जब ये फ़ूड डाइजेस्ट ही नहीं होगा। तो ये छोटी आंत में भी अब्ज़ोर्ब नहीं होगा और इस खाने से आपको जो भी नुट्रीएंट्स मिलने चाहिए थे। वो आपको नही मिल पाएंगे और आपको इस फ़ूड को खाने का कोई फायदा ही नहीं होगा। इसलिए आपको अपने खाने को अच्छी तरह से चबाकर खाना हैं। जिससे इसके सारे नुट्रीएंट्स आपको मिल सके।

आयुर्वेद के अनुसार आपको अपने खाने को 32 बार चबाकर खाना चाहिए। जिससे सॉलिड पार्टिकल अच्छे से ब्रेक हो जाएँ और स्लाइवा अच्छी तरह से इनमे मिक्स हो जाएँ। इस तरह से आपका खाना आसानी से डाइजेस्ट हो जाएंगा और आपको इस फ़ूड से सारे नुट्रीएंट्स मिल जाएंगे।

2- हमे कभी भी ज़्यादा खाना नहीं खाना चाहिए। हमे अपने पेट में थोड़ी खाली जगह छोड़नी चाहिए। क्यूंकि हमारे पेट में चर्निंग एक्टिविटी होती हैं। जब हम ज़्यादा खाना खा लेगे, तो ये एक्टिविटी होगी नहीं। आप इस बात को इस तरह से समझ सकते हैं। अगर आप किसी बोतल को पानी से फुल भर दे और फिर इसको ढक्कन लगा दे और अब बोतल को हिलाएं, तो पानी हिलेगा नही मिक्स ही नहीं होगा और अब हम बोतल से आधा पानी फेक दे। फिर ढक्कन लगाकर बोतल को हिलाएं, तो पानी मिक्स हो जाएंगा।

तो बस इसी तरह से हमारे पेट का भी हिसाब हैं। हमारा पेट चर्निंग एक्टिविटी करता हैं। तभी तो भोजन पचाने वाले सारे एंजाइम भोज़न में मिलकर भोज़न को पचाते हैं। अगर हम ज़्यादा खाना खा लेगे तो पेट को मूव होने के लिए ज़रा भी स्पेस नही मिलेगा। तब चर्निंग एक्टिविटी नहीं हो पाएंगी और एंजाइम खाने में अच्छे से मिक्स ही नहीं हो पाएंगे। तो तब हमारा खाना पचेगा नहीं सड़ेगा। खाना सड़ने पर हमे एसिडिटी, वोम्टिंग और मुहं से बदबू आने लगती हैं। इसलिए आपको खाने को पूरा पेट भरकर नहीं खाना हैं।

3- आपको खाना खाने के तुरंत बाद कभी भी पानी को नहीं पीना हैं। आयुर्वेद के अनुसार हमारे पेट में खाने को पचाने के लिए जठर अग्नि जलती हैं। जो खाने को पचाती हैं। अगर हम खाने के बाद पानी पी लगे, तो ये अग्नि बुझ जाती हैं। जिस वजह से आपका खाना सड़ने लगता हैं। इसलिए आपको खाना खाने के आधे से एक घंटे के बाद पानी पीना हैं। आप खाना खाने से पहले पानी पी सकते हैं। लेकिन खाने के तुरंत बाद ना पिएं।

4- आपको दिन में कुछ न कुछ फिजिकल एक्टिविटी जरूर करनी चाहिए। सारा दिन बेठे-बेठे रहने से या काम करने से हमारा ब्लड सर्कुलेशन खराब होने लगता हैं और हमारे इंटेसटाइन में पेरेसटोल्सेस मूवमेंट भी नहीं हो पाते हैं। जिससे खाना टाइम पर प्रोसेस नही हो पता हैं। इसलिए आपको कुछ न कुछ एक्टिविटी करना जरूरी हैं।

5- आपको अपनी डाइट में फाइबर्स फ़ूड को जरूर शामिल करना चाहिए। कुछ लोग हरी सब्ज़ियाँ और फल खाते ही नहीं हैं। जिससे उन लोगो का पेट साफ़ ही नहीं रहता हैं और इन चीज़ों में फाइबर होता हैं। फाइबर हमारे डाइजेशन को बेहतर बनाने का काम करते हैं। जब आप फाइबर्स फ़ूड खाते हैं, तो ये फ़ूड आपके पेट में एक साथ अच्छे से मूव करते है। जिससे डाइजेशन भी अच्छे से होता हैं।

अगर आप इन सब बातो को ध्यान मे रखेगे, तो आपका खाना सड़ेगा नहीं। पेट से जुड़ी कोई भी प्रॉब्लम नही होगी। आप हेल्दी रहेगे और लम्बा जिएंगे।

Image Source: yebook

Recipe Source: yebook

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